Thursday, December 18, 2014

मकर सौर संक्रान्ति.Makar Sankranti - SCIENTIFIC NEW YEAR

Photo: ....................मकर सौर संक्रान्ति..................

जितने काल में पृथिवी सूर्य के चारों ओर परिक्रमा पूरी करती है, उसको एक  सौर वर्ष कहते हैं और कुछ लम्बी वर्तुलाकार जिस परिधि पर पृथिवी परिभ्रमण करती है, उसको क्रान्तिवृत्त कहते हैं। ज्योतिषियों द्वारा इस क्रान्तिवृत्त के 12 भाग कल्पित किये गये हैं और उनके नाम आकाशस्थ नक्षत्रपुञ्जों से मिलकर बनी हुई कुछ मिलती जुलती आकृति वाले पदार्थों के नाम पर रख लिये गये हैं------1.मेष, 2.वृष, 3.मिथुन, 4.कर्क, 5.सिंह, 6.कन्या, 7.तुला, 8.वृश्चिक, 9.धनु, 10.मकर, 11.कुम्भ, 12.मीन।
प्रत्येक भाग वा आकृति "राशि"कहलाती है। जब पृथिवी एक राशि से दूसरी राशि में संक्रमण करती है तो उसको "संक्रान्ति " कहते हैं। लोक में उपचार से पृथिवी के संक्रमण को सूर्य का संक्रमण कहने लगे हैं। छः मास तक सूर्य क्रान्तिवृत्त से उत्तर की ओर उदय होता है और छः मास तक दक्षिण की ओर निकलता है। प्रत्येक षण्मास की अवधि को "अयन " कहते हैं। जब सूर्य उत्तर की ओर से निकलता है तब उस उदय की उस अवधि को "उत्तरायण"कहते हैं और दक्षिण की ओर से निकलने पर उस अवधि को "दक्षिणायन" कहते हैं। उत्तरायण में दिन बढता जाता है और दक्षिणायन में रात्रि बढती जाती है। सूर्य की मकर राशि की संक्रान्ति से उत्तरायण और कर्कसंक्रान्ति से दक्षिणायन प्रारम्भ होता है। सूर्य के प्रकाशाधिक्य के कारण उत्तरायण विशेष महत्वशाली माना जाता है। अत एव उत्तरायण के आरम्भ दिवस मकर की संक्रान्ति को भी अधिक महत्व दिया जाता है और स्मरणातीत चिरकाल से इस पर्व को मनाया जाता है। यद्यपि सही मकर संक्रान्ति 22 दिसम्बर को होता है तथापि यह पर्व मनाया जाता है तो भी सही।

वैद्यक शास्त्रों के अनुसार इस ऋतु में शीत के प्रतिकार के लिये तिल, तेल, तूल(रूई) का उपाय बताया गया हैः----

तिलस्नायी तिलोद्वर्ती तिलहोमी तिलोदकी।
तिलभुक् तिलदाता च षट्तिलाः पापनाशनाः।।

अर्थः---तिलमिश्रित जल से स्नान, तिल का उवटन, तिल का हवन, तिल का जल, तिल का भोजन और तिल का दान ये छः तिल के प्रयोग पापनाशक है।

आप सभी मित्रों को मकर संक्रान्ति की बहुत-2 शुभकामनाएँ।मकर सौर संक्रान्ति..................
Makar Sankranti - As per Vedic Hindu philosophy, Sun is considered to be the king of all the planets. And Makar Sankranti commemorates the expedition of sun to the Northern Hemisphere. Makar is a Sanskrit that literally means Capricorn whereas Sankranti denotes transition. Hence, sun's transition from Sagittarius to Capricorn sign in the northern hemisphere, during winter is Makar Sankranti. Sun takes an uttarayana route on January 14 and stays there until July 14. This festival also comes as Thanksgiving to Mother Nature for an abundance of crops, well being and prosperity. The festivities include sweets made of rice, jaggery, green gram and sesame.

The festivals is known as Khichri in UP, Sakat in Haryana and Punjab, Sukarat in MP, Bhogali Bihu in Assam and West Bengal, Pongal in Tamil Nadu, Sankranti in Andhra and Karnataka and Uttarayan in Rajasthan and Gujarat. People in North India celebrate Sankranti with lots of religious fervor and devotion towards Lord Surya. A holy dip in Ganga River is very popular among Hindu religion followers. Pilgrimage places like Haridwar, Banaras and Allahabad witness a huge rush of devotees on this auspicious day.
Makar Sankrantiजितने काल में पृथिवी सूर्य के चारों ओर परिक्रमा पूरी करती है, उसको एक सौर वर्ष कहते हैं और कुछ लम्बी वर्तुलाकार जिस परिधि पर पृथिवी परिभ्रमण करती है, उसको क्रान्तिवृत्त कहते हैं। ज्योतिषियों द्वारा इस क्रान्तिवृत्त के 12 भाग कल्पित किये गये हैं और उनके नाम आकाशस्थ नक्षत्रपुञ्जों से मिलकर बनी हुई कुछ मिलती जुलती आकृति वाले पदार्थों के नाम पर रख लिये गये हैं------1.मेष, 2.वृष, 3.मिथुन, 4.कर्क, 5.सिंह, 6.कन्या, 7.तुला, 8.वृश्चिक, 9.धनु, 10.मकर, 11.कुम्भ, 12.मीन।
प्रत्येक भाग वा आकृति "राशि"कहलाती है। जब पृथिवी एक राशि से दूसरी राशि में संक्रमण करती है तो उसको "संक्रान्ति " कहते हैं। लोक में उपचार से पृथिवी के संक्रमण को सूर्य का संक्रमण कहने लगे हैं। छः मास तक सूर्य क्रान्तिवृत्त से उत्तर की ओर उदय होता है और छः मास तक दक्षिण की ओर निकलता है। प्रत्येक षण्मास की अवधि को "अयन " कहते हैं। जब सूर्य उत्तर की ओर से निकलता है तब उस उदय की उस अवधि को "उत्तरायण"कहते हैं और दक्षिण की ओर से निकलने पर उस अवधि को "दक्षिणायन" कहते हैं। उत्तरायण में दिन बढता जाता है और दक्षिणायन में रात्रि बढती जाती है। सूर्य की मकर राशि की संक्रान्ति से उत्तरायण और कर्कसंक्रान्ति से दक्षिणायन प्रारम्भ होता है। सूर्य के प्रकाशाधिक्य के कारण उत्तरायण विशेष महत्वशाली माना जाता है। अत एव उत्तरायण के आरम्भ दिवस मकर की संक्रान्ति को भी अधिक महत्व दिया जाता है और स्मरणातीत चिरकाल से इस पर्व को मनाया जाता है। यद्यपि सही मकर संक्रान्ति 22 दिसम्बर को होता है तथापि यह पर्व मनाया जाता है तो भी सही।

वैद्यक शास्त्रों के अनुसार इस ऋतु में शीत के प्रतिकार के लिये तिल, तेल, तूल(रूई) का उपाय बताया गया हैः----

तिलस्नायी तिलोद्वर्ती तिलहोमी तिलोदकी।
तिलभुक् तिलदाता च षट्तिलाः पापनाशनाः।।

अर्थः---तिलमिश्रित जल से स्नान, तिल का उवटन, तिल का हवन, तिल का जल, तिल का भोजन और तिल का दान ये छः तिल के प्रयोग पापनाशक है।

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