Thursday, December 18, 2014

देवताओं की संख्या--

देव विवेचन
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देवताओं की संख्या---
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ब्राह्मण-ग्रन्थों में भी कई स्थलों पर देवताओं की संख्या 33 बताई गई है। शतपथ-ब्राह्मण 4.5.7.2 में आठ वसु, ग्यारह रुद्र, बारह आदित्य, द्यौ तथा पृथिवी को मिलाकर 33 देवताओं का उल्लेख है---"अष्टौ वसवः। एकादश रुद्रा द्वादशादित्या एमे एव द्यावापृथिवी त्रयश्त्रिंश्यौ त्रयश्त्रिंशद् वै देवाः प्रजापतिश्चतुश्त्रिंशः।"

एक अन्य स्थल पर द्यावापृथिवी के स्थान पर श.प.ब्रा. (11.6.5.3) में ही इन्द्र तथा प्रजापति को मिलाकर 33 देवों का उल्लेख प्राप्त होता है।
ऐतरेय ब्राह्मण (2.18) में भी द्यावापृथिवी के स्थान में प्रजापति तथा वष्ट्कार को मिलाकर 33 देवताओं का उल्लेख है।

पुराण साहित्य तक आते-2 देवताओं की संख्या में अत्यधिक वृद्धि हो गई थी। पुराणों में देवताओं की संख्या 33 करोड मानी गई है। ब्रह्मपुराण(110-147) में देवताओं की संख्या 3 करोड पाँच सौ हताई गई है। विष्णु-पुराण (1.15.1390 में 33 देवताओं का ही उल्लेख मिलता है। महाभारत(3.171) में भी 33 देवताओं का ही उल्लेख मिलता है।

इस प्रकार सर्वत्र देवों की संख्या 33 ही प्राप्त होती है।

"देवता" शब्द की व्युत्पत्ति और अर्थः--
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यास्क के अनुसार "देवता" शब्द का अर्थ हैः--
1.देवता देता है, इसलिए देव है।
2. वह दीप्त होता है, इसलिए देव है।
3. वह द्योतित होता है, इसलिए देव है।

"देवो दानाद् दीपनाद् वा द्योतनाद् वा द्युस्थानो भवतीति वा।"-निरुक्त--7.4

जो देव है वही देवता है--"यो देवः सा देवता।"

"देवात्तल्"-अष्टाध्यायी-5.4.27 सूत्र से देव शब्द से देव अर्थ में ही "तल्" प्रत्यय होता है।
"देव शब्दात् स्वार्थे तल् प्रत्ययो भवति।"
काशिका-5.4.27 के अनुसार भी --देव एव देवता है।

कौमुदीकार ने "नन्दिग्रहिपचादिभ्यो ल्युणिन्यचः"--अष्टाध्यायी-3.1.134 दिव् धातु से अच् प्रत्यय करके "देव" शब्द सिद्ध किया है।

"दिव्" धातु के 10 अर्थः-
क्रीडा (खेल), विजिगीषा (जीतने की इच्छा), व्यवहार, द्युति(चमक), स्तुति, मोद (प्रसन्नता), मद (तीव्र खुशी), स्वप्न, कान्ति, गति।